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Tuesday, June 9, 2009

लड़कियाँ फिर आगे: नकल यज्ञ फलीभूत हुआ

हाल ही में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाई स्कूल और इण्टरमीडिएट के परीक्षा परिणाम घोषित किए। हर साल की तरह इस साल भी अखबारों ने वही शीर्षक लगाया। लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी। मैं यह शीर्षक पिछले दो दशक से प्रायः हर साल पढ़ता आ रहा हूँ। इस खबर का आधार यह होता है कि परीक्षा में सम्मिलित होने वाली कुल लड़्कियों में से उत्तीर्ण होने वाली लड़कियों का प्रतिशत लड़कों के उत्तीर्ण प्रतिशत से अधिक होता है। लड़कियों द्वारा बेहतर प्रदर्शन का यह आँकड़ा हमारे ग्रामीण समाज की जिस विडम्बनापूर्ण तस्वीर को उजागर करता है उसकी पड़ताल तब की जा सकती है जब निम्न आँकड़े भी उपलब्ध हों-

 

  1. प्रदेश के चौदह वर्ष से अठारह वर्ष की आयुवर्ग (हाई स्कूल व इण्टर मीडिएट स्तर) के सभी लड़के-लड़कियों का लिंग अनुपात
  2. इसी आयु वर्ग से विद्यालय जाने वाले लड़के व लड़कियों का लिंग अनुपात
  3. बिन्दु-१ व २ के आँकड़ों में अन्तर का प्रतिशत ( शिक्षा के अवसर की सापेक्ष उपलब्धता)
  4. लड़कियों को अपने विद्यालय पर अपने गुरुजनों के सानिध्य में (स्वकेन्द्रीय) परीक्षा देने की सुविधा प्राप्त होने की प्रतिशतता

यदि कोई शोधार्थी इन आँकड़ों को उपलब्ध करा सकें तो ठोस निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। लेकिन अभी तो मैं व्यक्तिगत अनुभव और पर्यवेक्षण के आधार पर ग्रामीण विद्यालयों में लड़कियों की शिक्षा की उपादेयता पर आमजन के दृष्टिकोण को बता सकता हूँ। हाँ, मेरा उद्देश्य कहीं से भी लड़कियों की प्रतिभा को कम बताना नहीं है। न ही मैं सफलता के नये मापदण्ड स्थापित करने वाली लड़कियों का अनादर करना चाहता हूँ। मेरा फोकस केवल ग्रामीण समाज में फैली शिक्षा-निरोधी विषबेल की ओर है।

 

मोटे तौर पर लड़कियों की शिक्षा को गाँवों में उतनी तरजीह नहीं दी जाती जितनी लड़कों की शिक्षा को। लड़कियों के लिए नौकरी का उद्देश्य तो बिरले ही परिवारों में रखा जाता है। जो परिवार लड़कियों को पढ़ाते भी हैं तो सिर्फ़ इसलिए कि शादी करने में अड़चन न आए। कैरियर का महत्व कम ही होता है। इण्टर पास कराके शादी ढूँढना शुरू कर देते हैं। इसलिए सबकी कोशिश लड़की को बेदाग पास करा लेने की होती है। सबका मुक्त सहयोग मिलता है उन्हें। कई परीक्षा केन्द्र तो लड़कियों को अलग कमरों में बिठाकर विशेष सुविधा देने का इन्तजाम भी करते है। कोई निरीक्षक लड़कियों की चेकिंग नहीं करना चाहता। सभी उसके प्रति उदार दृष्टिकोण रखते हैं।

 

पास हो जाएगी तो शादी करके घर बसा लेगी और क्या? लड़कों से नौकरी तो छीन नहीं लेगी।

 

साल भर घर में झाड़ू-पोंछा, चौका-बरतन और रसोई सम्हालने वाली लड़कियाँ और बहुएं भी इण्टर पास करने के लिए परीक्षाकेन्द्रों पर पहुँची मिल जाएंगी। बहुएं इसलिए कि अब हाई-स्कूल/इण्टर की मेरिट पर भी गाँव में शिक्षामित्र और आँगन वाणी कार्यकर्त्री की नौकरी मिलने लगी है।

 

पहले तो केवल सॉल्वर रखे जाते थे, अब कुछ केन्द्र राइटर की व्यवस्था भी करते हैं। मुलायम सिंह यादव की कन्या विद्या धन योजना ने तो इस दिशा में कमाल ही कर दिया। इस योजना में इंटर पास होते ही २०००० रुपए का चेक सुनिश्चित था। केवल गरीबी का सर्टिफिकेट लगाना होता था जो इस भ्रष्ट समाज में काफी सुलभ हो गया है।

 

इण्टर की परीक्षा पास करने के बाद यदि तत्काल शादी का जुगाड़ नहीं फिट बैठा तो आगे भी नाम लिखाकर प्राइवेट पढ़ाई करानी पड़ती है ताकि लड़के वालों को बताया जा सके कि लड़की बी.ए./एम.ए. में पढ़ रही है। शादी तय हो जाने के बाद यह लड़के के ऊपर निर्भर है कि वह आगे क्या कराएगा। ऐसी हालत में लड़कियों की शिक्षा का उद्देश्य कैरियर बनाने और काबिलियत बढ़ाने के बजाय सामाजिक दृष्टि से स्वीकार्य बहू बनने का हो जाता है। इस उद्देश्य के मद्देनजर निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की लड़कियाँ शिक्षा के नाम पर केवल प्रमाणपत्र इकठ्ठा करके रह जाती हैं, जिसमें पूरा समाज ही सहयोग करने को आतुर रहता है।

 

इस वर्ष की परीक्षाओं में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लेकर अभिभावकों और छात्रों ने नकल के धन्धे का भरपुर लुत्फ़ उठाया। परीक्षा केन्द्र नीलाम हुए। प्रदेश के शिक्षा मन्त्री को खुलेआम स्वीकार करना पड़ा कि नकल हुई है। इसमें रोचक बात यह है कि प्रदेश के शिक्षाधिकारियों की बैठक में उन्होंने सबको फटकार लगाते हुए कहा कि नकल कराने वाले विद्यालयों को चिह्नित करके उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। यानि जहाँ का परीक्षा परिणाम अपेक्षा से अधिक अच्छा रहा है उनको नकलची मानकर दण्डित किया जाएगा।

 

मन्त्री जी ने उसी बैठक में राजकीय विद्यालयों के खराब प्रदर्शन को आड़े हाथों लेते हुए सम्बन्धित शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही की चेतावनी भी दे डाली। वे बेचारे सोच रहे हैं कि उन्हें भी शायद नकल यज्ञ में कुछ आहुति देनी चाहिए थी।

[मलय]